
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) आज प्रारंभ हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन सत्र में मुख्य संबोधन देते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी चाहे किसी भी दल से हों, उनका आचरण पूर्णतः न्यायपूर्ण और निष्पक्ष होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपूर्ण व्यवहार सिर्फ होना ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखना भी चाहिए।
राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही में पर्याप्त समय की आवश्यकता
बिरला ने कहा कि राज्य विधानसभाओं की कार्यवाही का घटता समय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए चिंता का विषय है। उनका कहना था कि “सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।”
उन्होंने आधुनिक सूचना और सोशल मीडिया के युग में संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
तकनीक और पारदर्शिता से सशक्त बनेगा संसद
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि AIPOC जैसे सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाते हैं और शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाते हैं। तकनीक का उपयोग, विधायकों का क्षमता निर्माण और जनता के प्रति जवाबदेही जैसे विषय आगामी दो दिन में सम्मेलन में चर्चा के मुख्य बिंदु होंगे।

पीठासीन अधिकारियों का कर्तव्य
बिरला ने कहा कि “सदन में सभी सदस्यों, खासकर नए और युवा सदस्यों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, ताकि विधानमंडल जनता की समस्याओं का प्रभावी मंच बने।”
इतिहास और आगामी कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश ने यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन अब चौथी बार आयोजित किया है। इससे पूर्व दिसंबर 1961, अक्टूबर 1985 और जनवरी–फरवरी 2015 में AIPOC की मेजबानी की जा चुकी है।
तीन दिवसीय सम्मेलन 21 जनवरी, 2026 को समाप्त होगा, जिसमें समापन सत्र और प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला संबोधन देंगे।
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